[100+] Best Javed Akhtar Shayari in Hindi 2021

Collection of best javed akhtar shayari in hindi

Javed Akhtar Shayari in Hindi

दर्द के फूल भी खिलते है
बिखर जाते है जख्म कैसे भी हो
कुछ रोज़ में भर जाते है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया

Javed Akhtar Shayari in Hindi

दिल को घेरे है
रोजगार के गम
रद्दी में खो गयी
किताब कोई

Javed Akhtar Shayari in Hindi

जब आईना तो देखो इक अजनबी देखो
कहां पे लाई है तुमको ये ज़िंदगी देखो

Javed Akhtar Shayari in Hindi

कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी

Javed Akhtar Shayari in Hindi

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराएंगे ऐसी कहानी दे गया
उस से मैं कुछ पा सकू ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी शायद बराए मेहरबानी दे गया
खैर मैं प्यासा रहा पर उसने इतना तो किया
मेरी पलकों की कितरों को वो पानी दे गया

Javed Akhtar Shayari in Hindi

दर्द अपनाता है पराए कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन
कौन दोहराए वो पुरानी बात
ग़म अभी सोया है जगाए कौन
वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुख झेले आज़माए कौन

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अगर दुसरो के जोर पर
उड़कर दिखाओगे
तो अपने पैरो से उड़ने
की हुनर भूल जाओगे

Javed Akhtar Shayari in Hindi

सँवरना ही है तो किसी की नजरों में संवरिये,
आईने में खुद का मिजाज नहीं पूछा करते

Javed Akhtar Shayari in Hindi

जो भी मैंने काम किया है
वो मेने दिल के करीब से ही किया है
जो काम मेरे दिल के करीब नहीं था,
उसको मैंने कभी किया ही नहीं।

Javed Akhtar Shayari in Hindi

हंसती आंखो में झांककर देखो
कोई आंसू नहीं छुपा होगा

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अक्ल ये कहती है दुनिया
मिलती है बाजार में
दिल मगर ये कहता है कुछ
और बेहतर देखिए

Javed Akhtar Shayari in Hindi

बहाना ढूंढते रहते है रोने का
हमे ये शौक है क्या आस्तीन भिगोने का
अगर पलक पर है मोती तो ये नही काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फाज में पिरोने का
जो फसल ख्वाब की तैयार की है तो ये जानो
की वक्त आ गया फिर दर्द कोई बोने का
ये जिंदगी भी अजब कारोबार है
की मुझे खुशी है पाने की कोई रंज ना खोने का
है चकनाचूर फिर भी मुस्कुराता है
वो चेहरा जैसे हो टूटे हुए खिलोने का

Javed Akhtar Shayari in Hindi

तब हम दोनो वक्त चुका कर लाते थे
अब मिलते है जब भी फुर्सत होती है ।

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अगर लहरों को है दरिया में रहना
तो उनको होगा अब चुपचाप जाना

Javed Akhtar Shayari in Hindi

हमको तो बस तलाश नए रास्तों की है
हम है मुसाफिर ऐसे जो मंजिल में। आए है ।

Javed Akhtar Shayari in Hindi

तुम फुजूल बातो का दिल पर बोझ मत लेना
हम तो खैर कर लेंगे जिंदगी बसर तन्हा

Javed Akhtar Shayari in Hindi

जो भी मैंने काम किया है,
वो मेने दिल के करीब से ही किया है।
जो काम मेरे दिल के करीब नहीं था,
उसको मैंने कभी किया ही नहीं।

Javed Akhtar Shayari in Hindi

उनकी चिरागो में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हम हवा से करे
हमको उठना तो मुंह अंधेरे था
लेकिन एक ख्वाब हमको घेरे था

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अगर आप जिंदा हैं तो
आपको वक्त के साथ बदलना चाहिए।

Javed Akhtar Shayari in Hindi

सपना कभी साकार नहीं होता
मोहब्बत का कभी आकार नही होता
सब कुछ हो जाता है इस दुनिया में
मगर दोबारा किसी से प्यार नहीं होता

Javed Akhtar Shayari in Hindi

इश्क और सुबह की चाय
दोनो एक समान होती है
एक बार वही नयापन
एक बार वही ताज़गी

Javed Akhtar Shayari in Hindi

ये दुनिया भर के झगड़े
घर के किस्से काम की बाते
बला हर एक टल जाए
अगर तुम मिलने आ जाओ

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अहसान करो तो दुआओं में। मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से
एक छोटे से सवाल पर इतनी खामोशी क्यों
बस इतना ही पूछा था कभी वफा की किसी से

Javed Akhtar Shayari in Hindi

किसी को क्या बताए की कितना मजबूर हूं
चाहा था सिर्फ एक तुमको और तुमसे ही दूर हूं
काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती
पीछे से आकर वो हमारे आंखो को छुपाती

Javed Akhtar Shayari in Hindi

झूठे इल्जाम मेरी जान
लगाया ना करो
दिल है नाजुक इसे तुम
ऐसे दुखाया ना करो

Javed Akhtar Shayari in Hindi

क्यूं है ? कब तक है ? किस की खातिर है
बड़े संजीदा मसले है हम

Javed Akhtar Shayari in Hindi

हंसती आंखों में झांककर देखो
कोई आंसू कही छुपा होगा

Javed Akhtar Shayari in Hindi

काटों का भी अहसान अदा कीजिए हुजूर
कई बार फूलो की लाज बचाई होगी

Javed Akhtar Shayari in Hindi

में और मेरी तनहाई अक्सर ये बात करती है
तुम होती तो कैसा होता

Javed Akhtar Shayari in Hindi

मुझे गम है की मैंने
ज़िन्दगी में कुछ नहीं पाया
यह गम दिल से निकल जाये
अगर तुम मिलने आ जाओ

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अक्सर वो कहते है वो मेरे है
अक्सर वो क्यों कहते है हैरत होती है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

खुदगर्ज बना देती है तलब की शिद्धत भी
प्यासे को कोई दूसरा प्यासा नहीं लगता

Javed Akhtar Shayari in Hindi

चलो तुम रास्ते खोजो बिछड़ने के
हम माहौल पैदा करते है मिलने के

Javed Akhtar Shayari in Hindi

इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले है
होठो पे लतीफे है आवाज़ में छाले है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

जब आइना देखो इक अजनबी देखो
कहाँ पे लाई है तुम ये ज़िन्दगी देखो

Javed Akhtar Shayari in Hindi

कुछ कमी अपनी वफाओं में भी थी
तुमसे क्या कहते तुमने क्या किया

Javed Akhtar Shayari in Hindi

संवरना है तो किसी के नज़रो में सवरिये
आइना में खुद का मिजाज़ पूछा नहीं करते

Javed Akhtar Shayari in Hindi

कभी जो ख्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गयी वो चीज़ क्या थी

Javed Akhtar Shayari in Hindi

मुझे मायूस भी करती नहीं है
यह आदत तेरी अच्छी नहीं है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

डर हमको लगता है रास्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफर पर ए दिल अब जाना होगा

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अभी जमीर में थोड़ी सी जान बाकी है
अभी हमारा कोई इम्तिहान बाकी है
हमारे घर को तो उजड़े हुए जमाना हुआ
मगर सुना है अभी वो मकान बाकी है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

ऊंची इमारतों से मकान मेरा गिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए

Javed Akhtar Shayari in Hindi

मेरी बुनियादों में कोई टेड थी
अपनी दीवारों को क्या इल्जाम दूं

Javed Akhtar Shayari in Hindi

अपनी वजहें बर्बादी सुनिए तो मजे की है
जिंदगी से यूं खेले जैसे दूसरे की है

Javed Akhtar Shayari in Hindi

ऐ सफर इतना बेकार तो ना जा
ना हो मंजिल कहीं तो पहुंचा दे

Javed Akhtar Shayari in Hindi

कोई शिकवा न गम न कोई याद
बैठे बैठे बस आंख भर आई

Javed Akhtar Shayari in Hindi

आगही से मिली है तन्हाई
आ मेरी जान मुझ को धोका दे

Javed Akhtar Shayari in Hindi

खुला है दर प तिरा इंतजार जाता रहा
खुलुस तो है मगर एतबार जाता रहा

Javed Akhtar Shayari in Hindi

खून से सिंची है मैने जो जमीं मर मर के
वो जमीं एक सितम गर ने कहा उसकी है

याद उसे भी एक
अधूरा अफसाना तो होगा
कल रास्ते में उसने हमको
पहचाना तो होगा

बुलंदी पर उन्हें
मिट्टी की खुशबू तक नहीं आती
ये वो शाखे है जिनको अब शहर
अच्छा नही लगता

जब आईना देखो एक अजनबी देखो
कहां पे ले आई तुमको ये जिंदगी देखो

सब का खुशी से फासला एक कदम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है ।

खुश शक्ल भी है ये अलग बात है
मगर हमको जाहिल लोग हमेशा अजीज थे

जिधर जाते है जाना उधर अच्छा नही लगता
मुझे पामाल रास्तों का सफर अच्छा नही लगता
गलत बातो को खामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत है फायदे इसमें मगर अच्छा नही लगता

झूठे इल्जाम मेरी जान लगाया ना करो
दिल है नाजुक इसे तुम ऐसे दुखाया ना करो

तुम्हारे पास तो फिर भी तुम हो
मेरे पास तो अब मैं भी नही

ओ निहार एक किस्सा है दुनिया के वास्ते
फरहाद ने तराशा था खुद को छत्ताओ पर

अगर फलक में है मोती तो ये नही काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फाज में पिरोने का

दिलों में तुम अपनी
बेताबियां लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम
नजर में ख्वाबों की
बिजलियां ले के चल रहे हो

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हमने समझाया
जिंदगी धूप तुम घना साया

तुम्हे भी याद नहीं में भी भूल गया
वो लम्हा कितना हसीन था मगर फिजूल गया

गिन गिन के सिक्के हाथ मेेरा खुदरा हुआ
जाती रही वो स्पर्श की नरमी बुरा हुआ

एक वही शख्स मुझे याद आ रहा है
जिसको चाहा था भूल जाऊं मैं

तुम फुजूल बातों का दिल में बोझ मत लेना
हम तो खैर कर लेंगे जिंदगी बसर तन्हा

बदन में कैद खुद को पा रहा हूं
बड़ी तन्हाई है घबरा रहा हूं

ठीक लिखा था मेरे हाथों के लकीरों में
तू अगर प्यार करेगा तो बिखर जायेगा।

कुछ बातों के मतलब है कुछ मतलब की बातें
जो ये फर्क समझ लेगा वो दीवाना तो होगा ।

यही हालात इब्तिदा से रहें
लोग हम से खफा से रहे

आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और में फिर दूर से देखा किया
जिंदगी भर मेरे काम आए असूल
एक एक करके मैंने उन्हें बेचा किया

वो सांप छोड़ दे डसना
ये मैं भी कहता हूं
मगर न छोड़ेंगे लोग उसको
गर न फुंकारा

यह जो घेर सन्नाटे है
वक्त ने सबको जी बनाते है
थोड़ा घूम है सबका किस्सा
थोड़ा धूप है सबका हिस्सा
आंख तेरी बेकार ही नम है
हर पल एक नया मौसम है
क्यों तू ऐसे पल खोता है
दिल आखिर तू क्यों रोता है।

आओ न मोहब्बत के नगमे
फिर से आंखो के सिलवटो पर रखते है।

तू गुजर जाए करीब से
वो भी मुलाकात से कम नही

उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप-चाप गुज़र जाते हैं

ग़ैरों को कब फ़ुर्सत है दुख देने की
जब होता है कोई हमदम होता है

उस के बंदों को देख कर कहिए
हम को उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी

मुझे मायूस भी करती नहीं है
यही आदत तिरी अच्छी नहीं है

नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो
हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग

फिर ख़मोशी ने साज़ छेड़ा है
फिर ख़यालात ने ली अंगड़ाई

ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के
वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग
जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग

है पाश पाश मगर फिर भी मुस्कुराता है
वो चेहरा जैसे हो टूटे हुए खिलौने का

एक ये दिन जब अपनों ने भी हम से नाता तोड़ लिया
एक वो दिन जब पेड़ की शाख़ें बोझ हमारा सहती थीं

तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी
डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

सदा एक ही रुख़ नहीं नाव चलती
चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की

शह-ज़ोर अपने ज़ोर में गिरता है मिस्ल-ए-बर्क़
वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले

ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

अभी से पाँव के छाले न देखो
अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है

वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं

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